Posts

रामायण

प्रमुख हिन्दू धर्मग्रंथ रामायण भगवान श्री राम के मर्यादित चरित्र को उजागर करता है। यह आदर्श व्यक्ति, आदर्श रिश्तों और आदर्श शासन व्यवस्था की भी रोचक कथा है, जो व्यावहारिक जीवन के अनमोल सूत्रों को भी सिखाती है। श्रीराम ही नहीं रामायण में बताया हर पात्र मानवीय जीवन, स्वभाव और गुणों से जुड़े कोई न कोई संदेश देता है। जिनके द्वारा कोई भी इंसान जीवन में संयम, संतुलन और अनुशासन लाकर सफलता व तरक्की पा सकता है। यही कारण है कि धर्म में रूचि रखने वाले और आस्थावान अनेक लोग रामायण को पढऩा और जानना चाहते हैं। किंतु समय के अभाव के चलते वे रामकथा को सुनने या पढऩे से वंचित रहते हैं। इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए हम यहां बता रहे हैं सिर्फ 9 रोचक तस्वीरों के माध्यम से शास्त्रों में बताए एक श्लोक पर आधारित रामायण, जो एक श्लोकी रामायण के रूप में जानी जाती है। यहां बताई जा रही एक श्लोकी रामायण को प्रतिदिन राम दरबार जिनमें राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान आदि शामिल हों, का ध्यान कर पढऩा भी आपके जीवन से भय, चिंता और परेशानियों को दूर करने वाली मानी गई है - आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनं वैदेही हर...

Significance, Importance of BHANG/ CANNABIS in Indian Culture

Bhang in India is distributed as a religious offering during Shiva festivals like “Mahashivratri”. It has now become synonymous with the Holi festival, to the point where consuming bhang at that time is a standard practice. It is also available as Bhang golis (balls) which is just freshly ground hemp with water. Apart from this, sweetened bhang golis are also widely available. These are not considered a drug, but a traditional sleeping aid and appetizer. Bhang is also part of much ayurvedic medicinal preparation, i.e. bhang powder is available at ayurvedic dispensaries throughout the country. Bhang Ki Thandai Bhang Ki Thandai also known as Sardai is a drink popular in many parts of sub-continent which is made by mixing bhang with thandai, a cold beverage prepared with almonds, spices (mainly black pepper), milk and sugar. Origin of Bhang/ Cannabis Bhang was first used as part of the Hindu rite in India around 1000 BC and soon became an integral part of Hindu culture. The herb ...

श्रीराम के अनन्य भक्त श्री हनुमान

कलयुग में हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है। श्रीराम के अनन्य भक्त श्री हनुमान अपने भक्तों और धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों की हर कदम मदद करते हैं। सीता माता के दिए वरदान के प्रभाव से वे अमर हैं और किसी ना किसी रूप में अपने भक्तों के साथ रहते हैं। हनुमानजी को मनाने के लिए सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का नित्य पाठ। हनुमानजी की यह स्तुति का सबसे सरल और सुरीली है। इसके पाठ से भक्त को असीम आनंद की प्राप्ति होती है। तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा बहुत प्रभावकारी है। इसकी सभी चौपाइयां मंत्र ही हैं। जिनके निरंतर जप से ये सिद्ध हो जाती है और पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो जाती है। यदि आप मानसिक अशांति झेल रहे हैं, कार्य की अधिकता से मन अस्थिर बना हुआ है, घर-परिवार की कोई समस्यां सता रही है तो ऐसे में सभी ज्ञानी विद्वानों द्वारा हनुमान चालीसा के पाठ की सलाह दी जाती है। इसके पाठ से चमत्कारिक फल प्राप्त होता है, इसमें को शंका या संदेह नहीं है। यह बात लोगों ने साक्षात् अनुभव की होगी की हनुमान चालीसा के पाठ से मन को शांति और कई समस्याओं के हल स्व...

कामाख्या शक्तिपीठ का विशेष महत्व

हिन्दू धर्म में देवी के 51 शक्तिपीठों में से कामाख्या या कामरूप शक्तिपीठ का विशेष महत्व है । यह भारत की पूर्व-उत्तर दिशा में असम प्रदेश के गुवाहाटी में स्थित होकर कामाख्या देवी मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है। पुराणों के अनुसार यह देवी का महाक्षेत्र है। यह मन्दिर नीलगिरी नामक पहाड़ी पर स्थित है। यह क्षेत्र कामरूप भी कहलाता है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि देवी कृपा से कामदेव को अपना मूल रूप प्राप्त हुआ। देश में स्थित विभिन्न पीठों में से कामाख्या पीठ को महापीठ माना जाता है। इस मंदिर में 12 स्तम्भों के मध्य देवी की विशाल मूर्ति है। मंदिर एक गुफा में स्थित है। यहां जाने का मार्ग पथरीला है, जिसे नरकासुर पथ भी कहा जाता है। मंदिर के पास ही एक कुण्ड है, जिसे सौभाग्य कुण्ड कहते हैं। इस स्थान को योनि पीठ के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि यहां देवी की देह का योनि भाग गिरा था। यहां पर देवी का शक्ति स्वरूप कामाख्या है एवं भैरव का रूप उमानाथ या उमानंद है। उमानंद को भक्त माता का रक्षक मानते हैं। कथा- शिव जब सती के मृत देह लेकर वियोगी भाव से घूम रहे थे, तब भगवान विष्णु ने उनका वियोग दूर करने के लि...

मंगलकारी रूप मां कालरात्रि

नवरात्रि में शक्ति आराधना तन-मन को संयम और अनुशासन द्वारा साधकर जीवन को आनंद और सुख से बिताने का संदेश देती है। नवरात्रि धर्म और ईश्वर से जुड़कर सफल जीवन और उसके लिए किए जाने वाले प्रयासों के लिए शक्ति संचय का अहम और शुभ काल है। चैत्र शुक्ल नवरात्रि की सातवीं रात सिद्धि की रात्रि मानी गई है। क्योंकि इस दिन आदिशक्ति दुर्गा के तामसी किंतु मंगलकारी रूप कालरात्रि की उपासना की जाती है। यह शक्ति और रात्रि सांसारिक कामनाओं के साथ तंत्र साधनाओं की सिद्धि की लिए भी अचूक मानी गई है। मां कालरात्रि का स्वरूप जितना भयानक है, उतना ही मंगलकारी और शुभ भी है। माता की उपासना जीवन से जुड़े हर भय, संशय और चिंता का नाश करने के साथ-साथ सभी सिद्धियां, सुख, साहस और कौशल देने वाली है। सरल शब्दों में मां कालरात्रि की भक्ति सफलता की राह में आने वाली मानसिक और व्यावहारिक बाधाओं को दूर कर देती है। मां कालरात्रि संकटमोचक शक्ति के रूप में पूजनीय है। अगर आप भी परेशानियों का सामना कर रहें है तो नवरात्रि के सातवें दिन (30 मार्च) को मां कालरात्रि के इस मंत्र का देवी पूजा के दौरान जरूर जप करें - - मां कालरात्रि की...

भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण

1 अप्रैल को राम नवमी है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन श्रीराम का जन्म हुआ था। ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम नीले रंग के थे वहीं शास्त्रों में श्रीकृष्ण को काले रंग का बताया है। यह सुनकर अक्सर हमारे मन में यह सवाल उठता है कि हमारे भगवानों के रंग-रूप इतने अलग क्यों हैं। भगवान कृष्ण का काला रंग तो फिर भी समझ में आता है लेकिन भगवान राम को नील वर्ण भी कहा जाता है। क्या वाकई भगवान राम नीले रंग के थे, किसी इंसान का नीला रंग कैसे हो सकता है? वहीं काले रंग के कृष्ण इतने आकर्षक कैसे थे? इन भगवानों के रंग-रूप के पीछे क्या रहस्य है। राम के नीले वर्ण और कृष्ण के काले रंग के पीछे एक दार्शनिक रहस्य है। भगवानों का यह रंग उनके व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। दरअसल इसके पीछे भाव है कि भगवान का व्यक्तित्व अनंत है। उसकी कोई सीमा नहीं है, वे अनंत है। ये अनंतता का भाव हमें आकाश से मिलता है। आकाश की कोई सीमा नहीं है। वह अंतहीन है। राम और कृष्ण के रंग इसी आकाश की अनंतता के प्रतीक हैं। राम का जन्म दिन में हुआ था। दिन के समय का आकाश का रंग नीला होता है। इसी तरह कृष्ण का जन्म आधी रात के समय हुआ था और रात के समय...

नवरात्रि: भगवान राम की आराधना

नवरात्रि में शक्ति की उपासना के साथ ही वासंतिक नवरात्र में भगवान राम की भी आराधना की जाती है। असल में शक्ति और श्रीराम उपासना के पीछे संदेश यह भी है कि जीवन में कामयाबी को छूने के लिए बेहतर व मर्यादित चरित्र व व्यक्तित्व की शक्ति भी जरूरी है। इस तरह नवरात्रि व रामनवमी शक्ति के साथ मर्यादा के महत्व की ओर इशारा करती है। खासतौर पर शक्ति के मद में रिश्तों, संबंधों और पद की मर्यादा न भूलकर दुर्गति से बचना ही दुर्गा पूजा की सार्थकता भी है। जगतजननी का यही स्वरूप व्यावहारिक जीवन में स्त्री को माना जाता है। यही कारण है कि वेद-पुराणों में 16 स्त्रियों को मां के समान दृष्टि रखने और सम्मान देने का महत्व बताया गया है। कौन हैं ये स्त्रियां जानिए - स्तनदायी गर्भधात्री भक्ष्यदात्री गुरुप्रिया। अभीष्टदेवपत्नी च पितु: पत्नी च कन्यका।। सगर्भजा या भगिनी पुत्रपत्त्नी प्रियाप्रसू:। मातुर्माता पितुर्माता सोदरस्य प्रिया तथा।। मातु: पितुश्र्च भगिनी मातुलानी तथैव च। जनानां वेदविहिता मातर: षोडश स्मृता:।। जिसका अर्थ है कि वेद में नीचे बताई 16 स्त्रियां मनुष्य के लिए माताएं हैं- स्तन या दूध पिलाने व...